२००१ में स्थापित सृजन सारथी एक पंजीकृत संस्था है, जिसका उद्येश्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रियाओ में भागीदार बनकर समाज में एक सार्थक बदलाव लाने का है। इसका गठन ऐसे समय में हुआ शहर की अधिकांश संस्थाए मात्र कागजो में सिमटकर रह गई थी वही रंगमंच जैसी सशक्त विधा भी अपने पुराने नाटको के मंचन और प्राचीन दीमक लगे हुए अनुभवों के सहारे अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्षरत थी. संस्था ने नाट्य लेखन एवं नाट्य लेखको को प्रोत्साहित करने के उद्येश्य से नवीनतम नाटको का मंचन करना प्रारम्भ किया. संस्था अब तक कृष्ण नहीं बन पाउँगा, तुम कहाँ हो माँ, दूल्हा तैयार है, जवाब दो गांधी, असली अपराधी कौन जैसे नए नाटको का मंचन किया जिनका लेखन युवा नाट्य लेखको द्वारा किया गया था. संस्था द्वारा मंचित नाटक कन्या भ्रूण हत्या, दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओ, जातिवाद, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दो पर अपनी आवाज़ बुलंद करने के साथ ही जन-चेतना के अपने प्रयासों में सतत प्रयत्नशील है.

 

वर्तमान में ऑडियो विज़ुअल जैसे सशक्त माध्यम को अपनी कार्यशैली के रूप में अपनाकर संस्था ने लघु फिल्म, म्यूजिक एल्बम के निर्माण एवं प्रदर्शन से सामाजिक बदलाव के अपने प्रयासों को एक नई दिशा दी है. संस्था द्वारा निर्मित लघु फिल्मे देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे फिल्म समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने के साथ ही दर्शको एवं समीक्षको द्वारा वाहवाही बटोरने में भी सफल रही है. संस्था स्वयं भी समय-समय पर इस प्रकार के समारोह का आयोजन करती रही है. संस्था अपने कर्यक्षेत्र में होने वाले काल्पनिक, मिथ्या और जन-साधारण को भ्रमित करने वाली प्रतियोगिताओ, ऑडिशन के खिलाफ भी जन-चेतना का प्रयास कर रही है. संस्था पैसे लेकर फिल्मो में काम देने के प्रलोभन के सख्त खिलाफ है.